Wednesday, July 29, 2009

"जिन्दगी से खिलवाड़"

"जिन्दगी से खिलवाड़"

हरियाणा प्रदेश में कानून को ठेंगा दिखाकर खादय पदार्थों में मिलावट के काले कारोबार को खुलेआम मुनाफेखोर अंजाम दे रहे है | समाज के सजग प्रहरी पत्रकारों ने अपनी कलम से आम इंसान की जिन्दगी से खिलवाड़ करने वालों का हलाँकि भंडाफोड़ कर केवल उन्हें नंगा करने का प्रयास किया, बलिकि कानून के कुछ भ्रष्टाचारी पहरेदारों को कुम्भकरण की नींद से जगाने का प्रयास भी किया |परन्तु बड़ी ही शर्म की बात है कि सबसे पहले इस मिलावटी कारोबार को दबाने का प्रयास करने वालों में वो लोग भी शामिल थे, जो आज पत्रकारिता के नाम पर काला दाग है और सिवाए दलाली के कुछ नहीं करते |यही नहीं इस पत्रकार जगत में वो काली भेडें भी शामिल हैं जिन्होंने बहती गंगा में हाथ धोना ही गवांरा समझा और एक गन्दी मछली की भांति सारे तालाब को भी गन्दा कर डाला है |नकली और मिलावटी काले कारोबार करने वालों में केवल खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले ही शामिल हैं ब्लिकी तरहां तरहां की बिमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए जीवन रक्षक दवा निर्माता भी पीछे नहीं हैं | आज इस काले कारोबार के गोरख धंधे का पर्दाफाश होने के बावजूद राज्य सरकार और कानून के पहरेदार मिलावटखोरों के ख़िलाफ़ कोई करवाई करने के बजाय आँखें मूंदे बैठे हैं | हरियाणा का शायद ही कोई ऐसा जिला बचा हो जिसमें नकली खोय (मावा) जिससे कई तरहां की नकली मिठाई बनाई जाती है | दूध , पनीर और देसी घी शरेआम बेचा जा रहा है | पानीपत और हरियाणा के दुसरे जिलों से भारी मातृ में नकली देसी घी और नकली पनीर तक पुलिस ने मीडिया की खबरों के बाद पकड़ा | अम्बाला में भी कई बार ऐसे नकली मावा पनीर और देसी घी बनाकर बेचने वाले कालेकारोबारी पकड़े गए हैं | लेकिन अम्बाला में पिछले दिनों हमने भी एक सुचना मिलने पर नकली देसी घी के काले कारोबार की तह तक जाने के लिए एक व्यक्ति का पीछा किया | जब परचून करियाना की दूकान पर उस व्यक्ति को नकली डालडा (वनस्पति) घी बेचते पकड़ा तो उसके हाथ पैर फूल गए | जब इस व्यक्ति को हमने पुछा कि आख़िर वो आम लोगों की जिन्दगी से खिलवाड़ केवल अपने मुनाफे के लिए क्यों कर रहा है तो वह उसने साफ़ इनकार कर दिया कि नकली घी का टिन उसका है ही नहीं | हमने देखा यह टिन का दिबा जिसपर राजहंस वनस्पति लिखा था खोलने पर पता चला कि उसमें मात्र एक पाउडर ही है जिसमें बाद में तेल नुमा कोई तरल पदार्थ डालकर ग्राहकों को परोस दिया जाता | बहरहाल जब यह गोरखधंधा करने वाला कलाकारोबारी समर चलता हुआ देख झट समझ गया कि अब वो फंस गया है तो वेह मोके से फरार होने लगा हमारे एक साथ ने उसका पीछा भी किया | लेकिन वो इतना शातिर निकला ख़ुद को फंसता देख दुसरे काले कारोबारियों को इकठा कर हमारा विरोध करने लगा | हमने तुंरत पुलिस को फोन लगाया लेकिन पुलिस कंट्रोल रूम से जब हमें कोई मदद नहीं मिली तो सभी कालेकरोबारियों ने इकठा होकर कुछ दलाली करने वाले पत्रकारों और छूट भये नेतायों के साथ मिलकर विरोध पर उतारू हो गया | काफ़ी देर तक हमें अपनी अवेध हिरासत में रखने के बाद पुलिस के साथ सांठ गाँठ कर हमारे विरूद्व ही पैसे की मांग करने का माला दर्ज करवा दिया | जब बाद में शहर के कुछ वरिष्ठ पत्रकारों को सारे मामले का पता चला तो उनहोंने इन काले करोबारिओं के के ख़िलाफ़ भी नकली घी बेचने और अवेध हिरासत में रखने का मामला दर्ज करने की मांग जिला एस.पी से की और हमारे केमरे की रिकॉर्डिंग को जो लगतार रिकॉर्डिंग कर रहा था के आधार बनाकर सारे मामले में हस्तक्षेप कर कानूनी करवाई करने की मांग की | बस सभी काले कारोबारियों के हाथ पाँव फूल गए | तभी अपने बचायो की खातिर उन्होंने पुलिस के साथ मिलकर मामला रफा दफा करने और माफ़ी मांगने को भी तैयार हो गए | इसमें वो लोग जो पत्रकारिता के नाम पर काला धब्बा है ने अपने स्वार्थों के लिए पर्दे के पीछे रहकर अपने कारनामों को भी छुपाने का प्रयास किया | अब सवाल यह उठता है कि आख़िर जब हमारे केमरे में सारी सचाई क़ैद थी फीर भी जिला प्रशाशन चुप कियों था | कियों नहीं इन काले कारोबारियों के ख़िलाफ़ करवाई की गयी ? आख़िर कहाँ से यह घी रहा है जो इंसान के लिए जहर है | कियों नहीं उनका सेम्पल भरा गया ? हम अपने चैनल पर इस सारे कारनामे को दिखाना कहते थे लेकिन उन चैनल वालों ने भी हमारा साथ नहीं दिया | बलिकि नोकरी से हटा दिया गया | अब सवाल यहाँ पत्रकारों के होंसले का था जिसको चैनल के मालिक और कुछ दलाल जो पत्रकारिता के नाम पर काला दबा हैं ने धराशाही कर दिया | अब जरा आप ही सोचिये भला इस समाज के प्रति अपना दायित्व कैसे कोण और कियों निभाएगा ? और आप भी यह भली भाँती सोचिये किया जो बाज़ार से आप खरीद रहे हैं क्या वो शुद्ध है ? , जिस दूकानदार से आप खरीद रहे हैं क्या वो सचमुच आपको जो दे रहा है वो ठीक है ? यही नहीं अम्बाला के साथ कई हरियाणा के दवानिर्माता भी कहीं किसी से पीछे नहीं जो कहने को जीवन रक्षक दवाएं बनाते हैं लेकिन यहाँ यह कहना कदाचित ग़लत होगा कि पत्रकारों का काले कारोबारियों के ख़िलाफ़ अभियान जारी है , लेकिन सोचना और जागृत होना होगा आम नागरिक को और करनी होगी आवाज बुलंद इन सभी काली भेड़ों के ख़िलाफ़ | मोखिक रूप से काले कारोबारी और पुलिस स्थानीय प्रशाशन भी यह मानता है की यह गोरख धंधा सरेआम हो रहा | जब कानून के रखवाले अपने नाक के नीचे लोगों की जिन्दगी से खिलवाड़ करवा रहे हैं तो भल्ला प्रहरी वहाँ क्या करेंगे ?










1 comment:

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

मिलावट का ज़माना है भाई!!!